बंगाल में ‘कमल’, तमिलनाडु में विजय का ‘धमाका’

  • केरल में उलटफेर, असम-पाडुचेरी में एनडीए का दबदबा
  • परिणामों से बदला पावर बैलेंस, दलों के लिए नई चुनौती
  • विस चुनाव परिणामों में दिख गया मतदाता का बदला मूड

त्वरित टिप्पणी
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों ने देश की राजनीति की दिशा बदलने की उम्मीद है। पांच राज्यों के चुनावी समर में जहाँ पश्चिम बंगाल में सत्ता का ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिल रहा है, वहीं तमिलनाडु में फिल्मी पर्दे से राजनीति में उतरे अभिनेता विजय ने सबको चौंका दिया है।
पांच राज्यों में हुए विधानसभा के चुनाव परिणाम के रुझानों के अनुसार इस बार सबसे बड़ा उलटफेर पश्चिम बंगाल में होने वाला है, जहाँ भाजपा ने दो-तिहाई बहुमत के साथ टीएमसी के 15 साल के शासन को उखाड़ फेंकने की दिशा में आगे बढ़ रही है। रुझानों के अनुसार बीजेपी 190 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की ओर है। सोनार बांग्ला के नारे ने इस बार जमीन पर काम किया और ममता बनर्जी का खेला उन पर ही भारी पड़ता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हार की संभावना और तृणमूल के बड़े मंत्रियों का पिछड़ना इस बात का संकेत है कि जनता ने पूरी तरह से बदलाव के लिए वोट किया है।
दूसरी ओर दक्षिण भारत की राजनीति में आज एक नया सितारा उभरा है। अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्टी कड़गम ने अपने पहले ही चुनाव में द्रविड़ राजनीति के दिग्गजोंकृको कड़ी टक्कर दी है। उनकी पार्टी 100 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है, जिससे एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता से बाहर होती दिख रही है। इसके साथ ही केरल में हर पांच साल में सत्ता बदलने का रिवाज फिर से लौटने वाला है। पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ को इस बार बड़ी शिकस्त मिल रही है। यहां लोगों ने एंटी-इंकंबेंसी और भ्रष्टाचार के मुद्दों ने केरल की जनता को विकल्प चुनने पर मजबूर किया।
पूर्वाेत्तर में बीजेपी का किला अभेद्य बना हुआ है। असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी गठबंधन ने 80 से अधिक सीटें जीतकर हैट्रिक की ओर है। वही पाडुचेरी में यहाँ एन. रंगासामी की पार्टी और बीजेपी गठबंधन फिर से सरकार बनाने जा रही है।
बता दें कि पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम से बंगाल में बीजेपी की जीत और तमिलनाडु में विजय का उदय आने वाले 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए एक नया नैरेटिव तैयार हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अभी तक के चुनाव परिणाम आने वाले राष्ट्रीय चुनावों के लिए संकेतक साबित हो सकते हैं, जहां भाजपा अपने संगठन विस्तार और योजनाओं के दम पर आगे बढ़ने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्षी दल इन नतीजों से सीख लेकर अपनी रणनीति को धार देंगे। पांच राज्यों के चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय लोकतंत्र में मतदाता का मिजाज तेजी से बदल रहा हैकृऔर यही बदलाव आने वाले समय में राजनीति की दिशा तय करेगा।

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