Thursday, October 22, 2026
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कानून—व्यवस्था पर व्यापारियों की चिंता, सुधार के लिए दिये ठोस सुझाव

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हमारे संवाददाता
देहरादून। शहर के प्रमुख व्यवसायियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने कानून—व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। ट्टस्थानीय व्यवसाय और कानून—प्रवर्तन—देहरादून परिप्रेक्ष्य’ विषय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में सभी ने एक स्वर में कहा कि अब समय आ गया है कि स्पष्ट नीतियों और ठोस कदमों के साथ सुधार किये जाए।
बैठक का आयोजन सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल और रेस्टोरेंट व्यवसायी आनंद कांती द्वारा किया गया। बैठक में होटल, रेस्टोरेंट, शिक्षा, परिवहन, रिटेल और अन्य क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख रूप से अनूपमा जोशी, एला गर्ग, कुनाल शमशेर मल्ला, रणधीर अरोड़ा, नवनीत ओबेरॉय, रसिक भाटिया, अविनाश तिवारी, माधव डालवी और हेमंत कूरिच शामिल रहे।
बैठक में चर्चा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि कानूनों का पालन एक समान तरीके से नहीं हो रहा, साथ ही प्रशासन और व्यापारियों के बीच भी संवाद की कमी है, कई नियम अस्पष्ट हैं, जिससे भ्रम पैदा होता है। इसका असर व्यापार और आम नागरिकों की सुरक्षा दोनों पर पड़ रहा है।
बैठक में व्यवसाईयों ने प्रशासन को सुझाव दिये कि सर्विंग टाइम पर स्पष्टता होनी चाहिए। यदि अंतिम ऑर्डर का समय रात 11 बजे है, तो ग्राहकों को कम से कम 30—45 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि वे आराम से भोजन कर सकें। इससे अनावश्यक विवाद कम होंगे। जबकि पुलिस—व्यापारी समन्वय के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाये जाने चाहिए। हर थाना स्तर पर एक आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाए, जिसमें रोजाना बार/रेस्टोरेंट बंद होने के बाद क्लोजिंग स्टेटस के साथ फोटो या वीडियो साझा किए जाएं। इससे पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा। उन्होने यह भी सुझाव दिया कि लाइसेंसिंग में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल लेट नाइट बार से जोड़ना सही नहीं है। ट्रैफिक नियम, ड्राइविंग व्यवहार और सार्वजनिक अनुशासनहीनतों पर एक साथ काम करने की आवश्यकता है। उन्होने चंडीगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहां देर रात तक गतिविधियां होने के बावजूद सख्त कानून—प्रवर्तन और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार के कारण बेहतर व्यवस्था बनी रहती है। बैठके दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि सामाजिक सुरक्षा हेतू. स्कूल स्तर से सुधार की शुरुआत प्रशासन को करनी चाहिए। छात्रों के बीच बिना लाइसेंस वाहन चलाने और बिना हेलमेट स्कूल आने जैसी समस्याओं पर चिंता जताई गई। सुझाव दिया गया कि स्कूलों में सख्त नियम लागू हों और अभिभावकों की जिम्मेदारी तय की जाए। बैठक में अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर भी चर्चा की गयी। जिनमें पीजी और हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों का सत्यापन अनिवार्य किया जाए, युवाओं में बढ़ती आक्रामकता और नशे की प्रवृत्ति पर नियंत्रण के लिए जागरूकता और सख्ती दोनों जरूरी हैं
बैठक में सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि शहर में बेहतर कानून—व्यवस्था के लिए केवल बार या रेस्टोरेंट को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन, पुलिस, श्ौक्षणिक संस्थान, व्यापारी और आम नागरिकख्नसभी के संयुक्त प्रयास और स्पष्ट नीतियां ही देहरादून में सुरक्षित, व्यवस्थित और भरोसेमंद वातावरण सुनिश्चित कर सकती हैं।

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