Thursday, October 22, 2026
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महज बुजुर्ग होना किसी को बहु और बच्चों को बेघर करने का अधिकार नहीं देता – भरण-पोषण अधिनियम के दुरुपयोग पर डीएम का फैसला बना मिसाल।

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देहरादून। जिलाधिकारी जनता दर्शन में राजपत्रित पिता जो चलने फिरने में असमर्थ है, ने डीएम से गुहार लगाई थी कि उनका बेटा बहु उनसे मारपीट करते हैं। उन्होंने भरण पोषण अधिनियम में वाद दाखिल कराने का अनुरोध किया जिस पर डीएम कोर्ट में वाद दाखिल किया तथा फास्ट्रेक सुनवाई की गई। पिता द्वारा अपने ही पुत्र, पुत्रवधु व 4 वर्षीय नौनिहाल पर भरणपोषण अधिनियम में वाद दायर कर दिया। जिला मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों को सुना तथा दोनो पक्षों द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूत की जांच करने पर पाया कि पिता चल फिर सकने में सक्षम है। माता-पिता कुल 55 हजार आय अर्जित करते हैं तथा अपने अल्पवेतनभोगी लाचार बेटे के परिवार को झूठा वाद दायर घर से बेघर करना चाहता है।
महज उम्रदराज होना बहु-बच्चों को बेघर करने का लाईसेंस नही है। डीएम कोर्ट में पेश हुए वाद में डीएम ने निर्णय सुनाया है। जहां एक राजपत्रित अधिकारी पद से सेवानिवृत्त एक पिता ने फ्रलेट की तृष्णा में निष्ठुर बन अपने ही अल्प वेतनभोगी बीमार बहु-बेटे व 4 वर्षीय पोती को घर से बेघर करने की योजना बनाई। अपने निजी स्वार्थ के चलते पिता अपने बहु-बेटे, नौनिहाल को घर से बेदखल करने की योजना बनाई तथा डीएम कोर्ट में भरणपोषण अधिनियम वाद डाला।
डीएम न्यायालय में पेश इस मार्मिक प्रकरण ने प्रचलित विचारधारा को झंझोड़ कर रख दिया। डीएम ने मात्रा 2 सुनवाई में स्थिति परखकर लाचार दम्पति को कब्जा प्रतिस्थापित किया है। भरणपोषण अधिनियम का दुरूपयोग करने वालों पर डीएम का फैसला नजीर बन गया है जिसमें वाद निर्णित, समाप्त कार्यन्वित किया गया हैं। दोनों पक्षों को त्वरित सुन डीएम ने अपना फैसला सुनाते हुए पिता द्वारा दाखिल साजिश डीएम कोर्ट ने खंडित कर दी है।
जिला मजिस्टेªट कोर्ट में दाखिल वाद संगीता वर्मा पत्नी जुगल किशोर वर्मा (माता-पिता) बनाम अमन वर्मा पुत्र नकरोंदा सैनिक कालोनी बालावाला में जहां राजपत्रित अधिकारी पद सेवानिवृत पिता जिसकी आय 30 हजार तथा माता की मासिक आय 25 हजार अपने अल्पवेतनभोगी बेटे अमन व उसकी पत्नी मीनाक्षी जिनकी कुल मासिक आय 25 हजार है पर भरणपोषण अधिनियम वाद पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाते हुए माता-पिता द्वारा दायर वाद को खंडित करते हुए लाचार दम्पति को डीएम ने किया कब्जा प्रतिस्थापित कर दिया है।
अमन वर्मा एक छोटी प्राईवेट नौकरी से अपने परिवार की देखभाल करता है, जिसमें एक चार साल की पुत्री भी है, जो कि जीवन की इस अवस्था में है कि उसको समुचित देखभाल, लालन-पालन व प्रेम एवं स्नेह की आवश्यकता है। ऐसी स्थिति में दोनों पक्षों के मध्य उत्पन्न मतभेद से विपक्षीगण की 4 वर्षीय पुत्री का भी भविष्य दांव
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