Thursday, October 22, 2026
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धराली आपदा: चार दिन बाद भी राहत कार्य मुश्किल, मलबे में दबे सैकड़ों लोगों की आशंका

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  • संसाधनों के अभाव में सर्च अभियान प्रभावित
  • सड़क मार्ग के सुचारु होने में लगेंगे कई दिन
  • मलबे से मृतकों के शव तलाशना मुश्किल
  • धराली से भागीरथी तक बिछा है मलवा ही मलवा

उत्तरकाशी। उत्तरकाशी के धराली में आपदा से हुई भयंकर तबाही को आज 4 दिन हो चुके हैं लेकिन अभी तक आपदा ग्रस्त क्षेत्र में पर्याप्त सहायता नहीं पहुंच सकी है तथा सड़क संपर्क मार्गों के सुचारू न हो पाने के कारण बचाव राहत कार्य हवाई सेवाओं के जरिए ही जारी है। हर्षिल से शुरू होने वाली इस तबाही के निशान धराली ही नहीं भागीरथी तक फैले हुए हैं। 20 हेक्टेयर क्षेत्र में मलवा व बोल्डरों के सिवाय कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। मलवा व भारी बोल्डरों में जीवन की तलाश बिना मशीनी सहायता के संभव नहीं है, यही कारण है कि राहत व बचाव के लिए सेना के जवानों से लेकर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आईटीबीपी के जवान तथा सिविल सोसाइटी के लोग भी लापता और मृतकों के शव तलाशने में अभी भी असमर्थ है।
इसमें कोई संदेह नहीं है कि सरकार व सेना ने यहां बचाव राहत में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। सेना के बचाव दलों के हजारों लोग यहां पहुंच चुके हैं सेेना के चिनूक और एमआई—17 से लेकर कई हेलीकॉप्टर लगातार इस कोशिश में जुटे हैं लेकिन धराली में मौजूद मैनपॉवर बिना मशीनों और तकनीकी सहायता के उस 15—20 मोटी परत के मलबे और टनों भारी मलबे में कुछ भी तलाश कर पाने में स्वयं को असमर्थ पा रहे हैं। अब तक जिन लोगों को रेस्क्यू किया गया है वह गंगोत्री के मार्ग पर यात्री ही है जिनकी संख्या 500 से अधिक बताई जा रही है जबकि अभी इतने ही और लोगों के फंसे होने की बात भी कहीं जा रही है।
जहां तक बात धराली की है यहां 5 अगस्त दोपहर को आई आपदा में कितने लोग मरे और कितने लापता है तथा कितने घायल है उनकी कोई सही संख्या अब तक सामने नहीं आई है। सेना की विज्ञप्ति के अनुसार इस आपदा में 100 से अधिक लोगों के मरने की आशंका जताई गई है जबकि प्रशासन द्वारा अब तक सिर्फ 5—6 लोगों के मरने की बात की गई है क्योंकि इनके शव बरामद हो चुके हैं। कुछ प्रत्यक्षदर्शी भी इस बात की संभावना बता रहे हैं कि इस आपदा में डेढ़ सौ से 200 लोगों की जान चली गई होगी। वहीं 30 से 40 होटल व होमस्टे के अलावा दर्जनों घरों के नामोनिशान मिटने की बात लोग कह रहे हैं।
इसरो से ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में धराली में 20 हेक्टेयर भू—भाग मलवा और पत्थरों से पट चुका है जहां आबादी थी। इस आपदा में कितने जान माल का नुकसान हुआ है इसका आकलन अभी भी संभव नहीं है। सड़क मार्ग को खोलने का काम अभी गंगानी में भागीरथी पर बने पुल की जगह बीआरओ द्वारा वैली ब्रिज निर्माण कार्य शुरू किए जाने तक ही पहुंच सका है। जबकि अभी आगे भी कई स्थानों पर सड़क पास आउट होने की खबरें हैं। गंगोत्री मार्ग को सुचारू बनाने में अभी कई दिन का समय लग सकता है।
गनीमत यह है कि युद्ध स्तर पर जारी इस आपदा प्रबंधन के कार्य में मौसम साफ होने के कारण पीड़ितों तक रसद तथा मेडिकल की आपूर्ति हो पा रही है लेकिन अभी तक न तो संचार सेवाएं और न बिजली आपूर्ति सुचारू हो सकी है न आवागमन का कोई सुविधा।

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