Thursday, October 22, 2026
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चिपको 2.0 आंदोलन: शिवालिक एलीफेंट रिजर्व में 4,700 पेड़ों की कटाई के विरोध में राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

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देहरादून। शिवालिक एलीफेंट रिजर्व में प्रस्तावित सड़क परियोजना के लिए करीब 4,700 पेड़ों की कटाई के विरोध में पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने ‘चिपको 2.0’ अभियान के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को ज्ञापन भेजकर उत्तराखण्ड में सतत विकास मॉडल लागू करने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने राज्य की संवेदनशील पारिस्थितिकी और प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए पेड़ों की कटाई केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही किए जाने की अपील की।

रविवार को देहरादून के सात मोड़ क्षेत्र में आयोजित शांतिपूर्ण प्रदर्शन में पद्मश्री सम्मानित बसंती देवी, डॉ. माधुरी बर्थवाल और कल्याण सिंह रावत सहित कई पर्यावरणविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनुष्ठान, जनजागरूकता अभियान तथा लोकगायिका एवं पर्यावरण कार्यकर्ता कमला देवी द्वारा जागर प्रस्तुत किया गया।

प्रदर्शनकारियों ने वर्ष 1970 के ऐतिहासिक चिपको आंदोलन की प्रेरणा लेते हुए गौरा देवी की शपथ दोहराई और पेड़ों से लिपटकर तथा उन पर रक्षा सूत्र बांधकर जंगलों की रक्षा का संकल्प लिया।

दरअसल, राज्य सरकार जौलीग्रांट एयरपोर्ट से ऋषिकेश तक आवागमन को सुगम बनाने के लिए शिवालिक एलीफेंट रिजर्व क्षेत्र से होकर सड़क परियोजना विकसित करना चाहती है, जिसके लिए लगभग 4,700 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। हालांकि, हाथियों के कॉरिडोर और वन्यजीवों पर संभावित प्रभाव को देखते हुए उच्च न्यायालय ने फिलहाल इस परियोजना पर रोक लगा रखी है, लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर उनकी चिंता अब भी बनी हुई है।

पर्यावरणविद् एवं लोक कलाकार डॉ. माधुरी बर्थवाल ने कहा कि शिवालिक रिजर्व का तेजी से विखंडन हो रहा है। यदि जंगलों का संरक्षण नहीं किया गया तो हाथी, तेंदुए और हिरण जैसे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित कर यह परियोजना सतत विकास का उदाहरण बन सकती है।

मैती आंदोलन के संस्थापक और पद्मश्री सम्मानित कल्याण सिंह रावत ने कहा कि इन वनों से कमल, पश्चिमी नयार और गगाश जैसी महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम होता है। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण के लिए हजारों पेड़ों की कटाई भविष्य में जल संकट को और गंभीर बना सकती है, जबकि इसके वैकल्पिक समाधान भी उपलब्ध हैं।

पद्मश्री बसंती देवी ने देहरादून में बढ़ते तापमान, बिगड़ती वायु गुणवत्ता और शहरी क्षेत्रों में बढ़ते हीट आइलैंड प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में पर्याप्त वन क्षेत्र होने के बावजूद शहरों में जल संकट और गर्मी लगातार बढ़ रही है।

वहीं, इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों ने कोई टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

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