- हंगामे से शुरू चार दिन का सत्र, 2 दिन में निपटा
- कानून व्यवस्था पर चर्चा को सरकार तैयार नहीं
- विपक्ष ने कहा अपराधियों को पुलिस व सरकार का संरक्षण
भराड़ीसैण। सूबे की कानून व्यवस्था को लेकर हंगामे के साथ कल भराड़ीसैण में शुरू हुआ चार दिवसीय विधानसभा सत्र आज दूसरे दिन ही इस मुद्दे पर हंगामे के साथ ही निपट गया। इस सत्र में दो दिनों में प्रश्नकाल तक में किसी एक सवाल का जवाब मिलना तो दूर कानून व्यवस्था पर भी सरकार चर्चा को तैयार नहीं हुई। इसके विपरीत आज भाजपा के मंत्री और विधायक भी विपक्ष के हंगामे का जवाब हंगामे से देने के लिए विरोध और प्रदर्शन पर उतर आए।
उल्लेखनीय है कि विपक्ष द्वारा बीते कल विधानसभा अध्यक्ष से कामकाज रोक कर नियम 310 के तहत कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सदन में चर्चा कराने की मांग की गई थी जिसे अध्यक्ष ऋतु खंडूरी द्वारा नकार दिया गया था। विपक्ष की मांग थी कि सरकार पंचायत चुनाव के दौरान हुई अराजक वारदातों और बढ़ते अपराधों पर चर्चा कराये जब उनकी मांग को नहीं माना गया तो फिर विपक्ष भी इस बात पर अड़ गया कि वह चर्चा से पूर्व सदन में कोई काम नहीं होने देगा। कल इस मुद्दे पर पूरा दिन गहमागहमी में बीत गया।
सरकार के रवैये से नाराज कांग्रेसी विधायक भी रात भर सदन में डेरा जमाये रहे लेकिन आज दूसरे दिन भी वैसी ही स्थिति बनी रही। कई बार विधानसभा की कार्यवाही बाधित होने के बाद भी जब कोई समाधान निकलता नहीं दिखा तो सरकार ने अनुपूरक बजट सहित सभी नौ विधेयक बिना चर्चा के पास कर दिए लेकिन उसे सदन की कार्रवाई भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करनी पड़ी।
सत्र की समाप्ति के बाद मीडिया ने जब खटीमा के विधायक व विपक्ष के उपनेता भुवन कापड़ी से बात की तो उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सूबे में खुलेआम गुंडे बदमाश घूम रहे हैं जिन्हें पुलिस और सरकार का संरक्षण प्राप्त है। जब से भाजपा की सरकार बनी है सूबे में महिलाओं के साथ अनाचार दुराचार के मामले बंढ़ गए हैं। उन्होंने कहा इनमें आरोपी अधिकांश भाजपा के नेता हैं। चंपावत की बात हो या फिर हरिद्वार की हो या सल्ट की हो अंकिता भंडारी केस में सरकार आरोपियों को बचा रही है उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के दौरे के समय दून में डकैती हो जाती है, हरिद्वार में होती है जो अभी तक नहीं खुली है। नशे का व्यापार फल फूल रहा है अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं व पुलिस संरक्षण में नैनीताल में पुलिस के सामने अपहरण हो जाता है पुलिस मूक दर्शक बनी रहती है। उन्होंने कहा कि सरकार हमारे सवालों से क्यों डर रही है? पहले सरकार कानून व्यवस्था पर चर्चा को तैयार होती अगले दिन हम आपदा पर चर्चा करते। सरकार गैरसैण में सैर सपाटे के लिए आती है चार दिन का सत्र 2 दिन में समाप्त हो जाता है। सारा बिजनेस निजी हाथों में दे दिया है नौकरियों के लिए 11 महीने का बाण्ड करते हैं 7 महीने की तनख्वाह खा जाते हैं। रोजगार दूसरे राज्य के लोगों को दे रहे हैं गांव—गांव शराब पहुंचा दी गई है सरकार निरंकुश हो गई है नेता व अधिकारी सुरक्षित नहीं है आम आदमी की सुरक्षा क्या होगी?
