पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर भारत ने जताई चिंता, कूटनीतिक हल पर दिया बल

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भारत चिंतित, कूटनीतिक समाधान पर दिया जोर!
दर्पण न्यूज 24/7
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात और बढ़ती जनहानि को लेकर भारत ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी संबंधित देशों से बातचीत और कूटनीति के माध्यम से जल्द समाधान निकालने की अपील की है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता से उसके रणनीतिक, आर्थिक और मानवीय हित सीधे जुड़े हुए हैं।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि पश्चिम एशियाई देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक निवास करते हैं तथा भारत के महत्वपूर्ण आर्थिक हित भी इस क्षेत्र से जुड़े हैं। ऐसे में वहां की अस्थिर स्थिति भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
प्रवक्ता ने कहा कि हाल के दिनों में संघर्ष तेज होने के साथ इसका दायरा अन्य क्षेत्रों तक फैलता दिखाई दे रहा है, जिससे व्यापक विनाश, जनहानि और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। भारत ने एक जिम्मेदार पड़ोसी देश के रूप में संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए शांति बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया है।
ओमान पर हमले की प्रधानमंत्री ने की निंदा
इजरायल-ईरान तनाव के बीच स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बीते दो दिनों में आठ खाड़ी देशों के नेताओं से बातचीत की। उन्होंने ओमान सहित क्षेत्र में हुए हमलों की कड़ी निंदा भी की।
2100 से अधिक भारतीय स्वदेश लौटे
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते भारतीयों की सुरक्षित वापसी जारी है। दुबई और अबूधाबी से मंगलवार शाम तक सात विशेष उड़ानों के जरिए 2100 से अधिक भारतीय नागरिक स्वदेश लौट चुके हैं।
एयरस्पेस बंद होने के कारण दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई एयरपोर्ट से 250 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। वहीं यात्रियों की सुविधा के लिए इंडिगो द्वारा जेद्दाह से हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद के लिए 10 विशेष उड़ानें संचालित की जा रही हैं।
भारत ने दोहराया शांति का संदेश
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और क्षेत्र में स्थायी शांति के पक्ष में है। सरकार ने सभी पक्षों से संयम बरतने और वार्ता के जरिए समाधान निकालने का आह्वान दोहराते हुए कहा कि संवाद ही वर्तमान संकट से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता है।

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