Thursday, October 22, 2026
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राज्यपाल ने हिमालयी सीमाओं की सुरक्षा के लिए सैन्य—नागरिक—समाज के समन्वित दृष्टिकोण पर दिया बल

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संवाददाता
देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने कहा कि हिमालय केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक जीवंत रणनीतिक प्रणाली है, जहाँ भू—आकृति, आधारभूत संरचना, जनसंख्या, शासन और सैन्य क्षमता निरंतर परस्पर क्रिया में रहती हैं।
आज यहां राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) द्वारा आज क्लेमेंट टाउन, देहरादून में “फोर्टिफाइंग द हिमालयाजः ए प्रोएक्टिव मिलिट्री—सिविल—सोसाइटी फ्यूजन स्ट्रेटजी इन द मिडिल सेक्टर” विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में प्रतिभाग किया गया। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि हिमालय केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक जीवंत रणनीतिक प्रणाली है, जहाँ भू—आकृति, आधारभूत संरचना, जनसंख्या, शासन और सैन्य क्षमता निरंतर परस्पर क्रिया में रहती हैं। उन्होंने कहा कि यघपि मध्य सेक्टर को परंपरागत रूप से अपेक्षाकृत शांत माना जाता रहा है, किंतु वर्तमान परिस्थितियाँ सतत सतर्कता और पूर्व तैयारी की मांग करती हैं। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र, विशेष रूप से भारत—चीन सीमा के मध्य सेक्टर में, सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सैन्य, नागरिक प्रशासन और समाज के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।  राज्यपाल ने कहा कि समकालीन सुरक्षा चुनौतियाँ अब केवल प्रत्यक्ष  सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हाइब्रिड वारफेयर, ग्रे—जोन गतिविधियों, द्वि—उपयोगी आधारभूत संरचना, और सीमा क्षेत्रों में निरंतर दबाव जैसे कारकों से भी आकार ले रही हैं। ऐसे परिदृश्य में हिमालयी क्षेत्रों की दीर्घकालिक सुरक्षा केवल सैन्य तैयारियों से नहीं, बल्कि नागरिक प्रशासन, स्थानीय समुदायों और प्रौघोगिकी के साथ प्रभावी समन्वय से सुनिश्चित की जा सकती है। राज्यपाल ने यह भी कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन का सीधा संबंध परिचालन क्षमता से है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण तथा सैन्य नागरिक से जुड़े विषय पर सेमिनार का होना अति महत्वपूर्ण है। कहा कि सेमिनार से निकले सुझाव हमारी सामरिक नीति को सुदृढ़ बनाने में सहायक एवं हिमालयी क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित जनसंख्या जैसी चुनौतियों को देखते हुए सेना, नागरिकों, सिविल प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय होना आवश्यक है। हिमालयी क्षेत्रों में सीमाओं के आस—पास निवास करने वाले नागरिक देश की सबसे बड़ी शक्ति है, जो वास्तव में देश के आँख और कान बनकर राष्ट्रीय सुरक्षा में अहम योगदान निभाते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा करना सेना के साथ साथ प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमावर्ती गांवों के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने सीमांत गांव माणा जैसे दूरस्थ और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने ही माणा को देश के अंतिम गांव की जगह देश के प्रथम गांव बताया था। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के विकास और नागरिकों के कल्याण के लिए संकल्पित होकर कार्य कर रही है। जीओसी—इन—सी, सेंट्रल कमांड लेफ्टिनेंट जनरल अनिंघ सेनगुप्ता ने मध्य क्षेत्र के बॉर्डर की चुनौतियों, नागरिक समाज के सशक्तीकरण और तकनीक के अपग्रेडेशन के साथ ही अवसंरचनात्मक विकास के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर राजदूत अशोक के. कांथा (सेवानिवृत्त), ब्रिगेडियर अंशुमान नारंग (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) सहित संबंधित उपस्थित थे।

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