Thursday, October 22, 2026
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सरकार का विवेक क्या कार्रवाई हो सकती है लोकेश्वर सिंह के खिलाफ

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संवाददाता
देहरादून। अपने कार्यालय में व्यक्ति को नग्न करके पीटे जाने की शिकायत पर पूर्व आईपीएस अधिकारी लोकेश्वर सिंह के खिलाफ शिकायत प्राधिकरण द्वारा दोषी पाये जाने के बाद सरकार को कार्रवाई के आदेश दिये अब देखना है कि सरकार लोकेश्वर सिंह के खिलाफ क्या कार्रवाई करेंगी।
उल्लेखनीय है कि आरटीआई कार्यकर्ता और कपडों के व्यापारी लक्ष्मी दत्त जोशी ने राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण को शिकायत की थी। जोशी का कहना था कि वह भी पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त सफाई कर्मचारी का पुत्र है। उनका घर पुलिस लाइन परिसर में है। वह छह फरवरी 2023 को पुलिस विभाग के क्वार्टर से निकल रही गंदगी की शिकायत करने के लिए एसपी पिथौरागढ लोकेश्वर सिंह के पास गया था। आरोप था कि इस पर लोकेश्वर सिंह उन्हें अपने कार्यालय से सटे एक कमरे में ले गये। वहां कोई सीसीटीवी कैमरा नही था। जिसके बाद उसको नग्न किया और मारपीट शुरू कर दी। उनके मातहतों ने भी जोशी के साथ मारपीट की थी। इसके बाद उसको पिछले दरवाजे से बाहर निकाल दिया जहां पर सीसीटीवी कैमरे नहीं थे। जिसके बाद उसने जिला चिकित्सालय में मेडिकल कराया जिसमें उसको एक्सरे की सलाह दी गयी। शिकायत मिलने के बाद लोकेश्वर सिंह को बुलाया गया लेकिन वह प्राधिकरण के समक्ष पेश नहीं हुए और शपथशुदा अपना पक्ष प्राधिकरण के समक्ष रखा। सारी साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने लोकेश्वर सिंह को दोषी मानते हुए इसके लिए कार्रवाही के लिए सरकार को पत्र भेज दिया। अब देखना है कि सरकार इस पूर्व आईपीएस के खिलाफ क्या कार्रवाही करेगी। जबकि न्यायमूर्ति एनएस धानिक की अध्यक्षता और पूर्व आईपीएस पुष्पक ज्योति व अजय जोशी की सदस्यता वाली पीठ ने तत्कालीन पुलिस कप्तान लोकेश्वर सिंह के तथ्यों में कोई दम नहीं पाया। पीठ का मानना है कि एसपी पिथौरागढ के तथ्य विश्वास योग्य नहीं है। जबकि शिकायतकर्ता लक्ष्मी दत्त जोशी के पास घटना के दिन ही कराया गया मेडिकल और एक्स—रे की रिपोर्ट है। इसमे चोट 12—24 घंटे के भीतर होना पाया गया। जबकि लोकेश्वर सिंह ने इसके विरोध में अपना कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया है। शिकायतकर्ता ने किसी थाने के कर्मचारी पर आरोप नहीं लगाये हैं लिहाजा एसपी लोकेश्वर सिंह पर यह आरोप सिद्ध होते है जोकि पुलिस विभाग की छवि को भी धूमिल करने वाले हैं। प्राधिकरण ने इस मामले में उत्तराखण्ड पुलिस अधिनियम की विभिन्न धाराओं में कार्रवाही की संस्तुति करते सरकार को निर्देशित किया है। अब यहां सरकार के विवेक पर निर्भर है कि वह ऐसे आईपीएस अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाही करेगी। क्योंकि ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाही होना जरूरी है जिससे कि आने वाले समय में ऐसे अधिकारियों पर लगाम लग सके।

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