- सीएम धामी जीरो ग्राउंड पर, रेस्क्यू की संभाली कमान
- 50 घंटे बाद गंगनानी व हर्षिल तक ही बन सका रास्ता
- हेली सेवा से बचाव व राहत कार्यो में आई तेजी
- 300 के आसपास पर्यटकों व 16 घायल एयरलिफ्ट
- घायलों को जॉलीग्रांट व एम्स भेजने का क्रम जारी
उत्तरकाशी। धराली में आई प्राकृतिक आपदा को आज तीन दिन का समय बीत चुका है। इस आपदा के साथ नेशनल हाईवे—94 यानी गंगोत्री हाईवे को हुए भारी नुकसान के कारण आज तीसरे दिन भी धराली तक सड़क मार्ग से पहुंचने की कोशिशें सफल नहीं हो सकी। लेकिन मौसम के साफ होने के कारण आज हेली सेवाओं के संचालन का रास्ता जरूर खुल गया। जिससे प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सामान और मदद टीमों के पहुंचने से बचाव व राहत कार्यो में तेजी जरूर आ सकी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर बचाव व राहत कार्य की कमान खुद संभाल ली है। आज वह न सिर्फ पीड़ितों व प्रभावित लोगों से मिले बल्कि अस्पताल जाकर घायलों का हाल भी उन्होंने जाना। धामी ने अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा बैठक भी की तथा जरूरी दिशा निर्देश भी दिए हैं। हेली सेवाओं के जरिए उत्तरकाशी से एनडीआरएफ की टीम व डॉक्टरों की टीम के अलावा अधिकारी भी धराली पहुंच गए हैं तथा दलदल में अब दबे लोगों की खोजबीन का काम भी शुरू हो गया है। हेली सेवा उत्तरकाशी से जरूरी सामान व बचाव राहत दलों को धराली ले जा रही है तथा उधर से प्रभावितों को लाने का काम भी किया जा रहा है।

धराली से ऊपर गंगोत्री धाम की तरफ भमोली गांव में फंसे हुए यात्रियों को रेस्क्यू कर उन्हें हर्षिल के मताली हेलीपैड पर लाया जा रहा है अब तक 300 से अधिक लोगों को सुरक्षित लाया जा चुका है वहीं 16 घायलों को एयरलिफ्ट कर लाया जा चुका है। कल सेना के चिनूक की सेवाएं बाधित रही थी लेकिन अब चिनूक हर्षिल तक पहुंच चुका है। गंभीर घायलों को रेस्क्यू कर एम्स और जॉलीग्रांट लाया गया है। सीएम ने निर्देश दिए हैं कि जब तक मौसम साफ है हेली सर्विस को जारी रखा जाए।
आपदा को 50 घंटे बीत जाने के बाद भी सड़क मार्ग से आज भी धराली तक पहुंचने का रास्ता साफ नहीं हो सका। भटवाड़ी में दो स्थानों पर हाईवे को ठीक कर लिया गया है लेकिन अभी गंगनानी में भागीरथी पर पुल बनाने का काम नहीं होने से गंगनानी से आगे नहीं जाया जा सकता है। सेना पुल निर्माण का काम शुरू कर चुकी है उधर हर्षिल तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग खुल गया है। सेना व एनडीआरएफ अब सैटेलाइट फोन के साथ धराली में काम पर जुटी है जिससे सूचनाओं का आदान—प्रदान भी संभव हो गया है। सुरक्षा बल और बचाव राहत के लिए धराली पहुंची टीमों द्वारा दलदल में जिंदगी की तलाश शुरू कर दी गई है लेकिन 3 दिन बाद कितनी जानें बचाई जा सकेगी? यह अभी भी सवाल है।
उधर जिन लोगों के परिजन इस आपदा के बाद से लापता है और उनके अपनों से संपर्क नहीं हो पा रहा है वह तलाश में इधर—उधर भटक रहे हैं। कई परिवार तो ऐसे हैं जिनके 5—5, 6—6 सदस्य आपदा के समय धराली में थे उनका कोई अता—पता नहीं चल पा रहा है तथा उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है इस आपदा के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार काफी लोगों के मरने या मलबे में दबे होने की बात कही जा रही है। 15 से 20 फीट तक ऊंचे इस मलबे के मरुस्थल में अब उनकी तलाश कितनी मुश्किल है इसे सहज समझा जा सकता है। क्योंकि समूचा धराली ही लगभग मरुस्थल में तब्दील हो चुका है फिर भी शासन प्रशासन द्वारा जिंदगी बचाने की जंग जारी है।
